चाण्क्य निति - I



मुर्खशिष्योपदेशेन दुष्ट्स्त्रिभरणेनच ।
दु:खितै समप्रयोगेण्पण्डितोव्यवसीदति ॥

निर्बुद्धि शिष्य को पढाने से, दुष्ट स्त्रि के पोशन से और दुखियो के साथ व्यवहार करने से पण्डित भी दुख पाता है।


Even an intellectual person comes to grief by teaching a fool, having a wicked wife and having interactions with the miserable. 
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